श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब ब्रह्माजीने देवताओंसे इस प्रकार कहा, तब उनकी चिन्ता दूर हो गयी। वे त्वष्टाके पुत्र विश्वरूप ऋषिके पास गये और उन्हें हृदयसे लगाकर यों कहने लगे॥ २६॥
त एवमुदिता राजन् ब्रह्मणा विगतज्वराः।
ऋषिं त्वाष्ट्रमुपव्रज्य परिष्वज्येदमब्रुवन्॥ २६
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब ब्रह्माजीने देवताओंसे इस प्रकार कहा, तब उनकी चिन्ता दूर हो गयी। वे त्वष्टाके पुत्र विश्वरूप ऋषिके पास गये और उन्हें हृदयसे लगाकर यों कहने लगे॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 736) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/7/26/