श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.31

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तस्मात् पितॄणामार्तानामार्तिं परपराभवम्।✎ 1083

तपसापनयंस्तात सन्देशं कर्तुमर्हसि॥ ३१

tasmāt pitṝṇāmārtānāmārtiṃ paraparābhavam|

tapasāpanayaṃstāta sandeśaṃ kartumarhasi|| 31

अर्थ

पुत्र! हम तुम्हारे पितर हैं। इस समय शत्रुओंने हमें जीत लिया है। हम बड़े दुःखी हो रहे हैं। तुम अपने तपोबलसे हमारा यह दुःख, दारिद्र्य, पराजय टाल दो। पुत्र! तुम्हें हमलोगोंकी आज्ञाका पालन करना चाहिये॥ ३१॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1083 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पितृणामार्तानामार्तिं → पितॄणामार्तानामार्तिं

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