न गर्हयन्ति ह्यर्थेषु यविष्ठाङ्घ्र्यभिवादनम्।✎ 2016
छन्दोभ्योऽन्यत्र न ब्रह्मन् वयो ज्यैष्ठ्यस्य कारणम्॥ ३३
na garhayanti hyartheṣu yaviṣṭhāṅghryabhivādanam|
chandobhyo'nyatra na brahman vayo jyaiṣṭhyasya kāraṇam|| 33
अर्थ
पुत्र! आवश्यकता पड़नेपर अपनेसे छोटोंका पैर छूना भी निन्दनीय नहीं है। वेदज्ञानको छोड़कर केवल अवस्था बड़प्पनका कारण भी नहीं है॥ ३३॥
न गर्हयन्ति ह्यर्थेषु यविष्ठाङ्घ्र्यभिवादनम्।
छन्दोभ्योऽन्यत्र न ब्रह्मन् वयो ज्यैष्ठ्यस्य कारणम्॥ ३३
पुत्र! आवश्यकता पड़नेपर अपनेसे छोटोंका पैर छूना भी निन्दनीय नहीं है। वेदज्ञानको छोड़कर केवल अवस्था बड़प्पनका कारण भी नहीं है॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 737) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/7/33/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)