श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.33

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

न गर्हयन्ति ह्यर्थेषु यविष्ठाङ्घ्र्यभिवादनम्।✎ 2016

छन्दोभ्योऽन्यत्र न ब्रह्मन् वयो ज्यैष्ठ्यस्य कारणम्॥ ३३

na garhayanti hyartheṣu yaviṣṭhāṅghryabhivādanam|

chandobhyo'nyatra na brahman vayo jyaiṣṭhyasya kāraṇam|| 33

अर्थ

पुत्र! आवश्यकता पड़नेपर अपनेसे छोटोंका पैर छूना भी निन्दनीय नहीं है। वेदज्ञानको छोड़कर केवल अवस्था बड़प्पनका कारण भी नहीं है॥ ३३॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2016 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): ष्ठाङ्घ्रॺभिवा → ष्ठाङ्घ्र्यभिवा

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