श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.38

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

तेभ्य एवं प्रतिश्रुत्य विश्‍वरूपो महातपाः।

पौरोहित्यं वृतश्‍चक्रे परमेण समाधिना॥ ३८

tebhya evaṃ pratiśrutya viśvarūpo mahātapāḥ|

paurohityaṃ vṛtaścakre parameṇa samādhinā|| 38

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! विश्‍वरूप बड़े तपस्वी थे। देवताओंसे ऐसी प्रतिज्ञा करके उनके वरण करनेपर वे बड़ी लगनके साथ उनकी पुरोहिती करने लगे॥ ३८॥

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