श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.29

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

गरुडो भगवान् स्तोत्रस्तोभश्छन्दोमयः प्रभुः।

रक्षत्वशेषकृच्छ्रेभ्यो विष्वक्सेनः स्वनामभिः॥ २९

garuḍo bhagavān stotrastobhaśchandomayaḥ prabhuḥ|

rakṣatvaśeṣakṛcchrebhyo viṣvaksenaḥ svanāmabhiḥ|| 29

अर्थ

बृहद्, रथन्तर आदि सामवेदीय स्तोत्रोंसे जिनकी स्तुति की जाती है, वे वेदमूर्ति भगवान् गरुड और विष्वक्सेनजी अपने नामोच्चारणके प्रभावसे हमें सब प्रकारकी विपत्तियोंसे बचायें॥ २९॥✎ 1912

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1912 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): प्रकरकी → प्रकारकी

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