श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.30

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

सर्वापद‍्भ्यो हरेर्नामरूपयानायुधानि नः।

बुद्धीन्द्रियमनः प्राणान् पान्तु पार्षदभूषणाः॥ ३०

sarvāpadbhyo harernāmarūpayānāyudhāni naḥ|

buddhīndriyamanaḥ prāṇān pāntu pārṣadabhūṣaṇāḥ|| 30

अर्थ

श्रीहरिके नाम, रूप, वाहन, आयुध और श्रेष्ठ पार्षद हमारी बुद्धि, इन्द्रिय, मन और प्राणोंको सब प्रकारकी आपत्तियोंसे बचायें॥ ३०॥✎ 1912

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1912 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): प्रकरकी → प्रकारकी

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