श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.40

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

गगनान्‍न्यपतत् सद्यः सविमानो ह्यवाक्शिराः।

स वालखिल्यवचनादस्थीन्यादाय विस्मितः।

प्रास्य प्राचीसरस्वत्यां स्नात्वा धाम स्वमन्वगात्॥ ४०

gaganānnyapatat sadyaḥ savimāno hyavākśirāḥ|

sa vālakhilyavacanādasthīnyādāya vismitaḥ|

prāsya prācīsarasvatyāṃ snātvā dhāma svamanvagāt|| 40

अर्थ

वहाँ आते ही वे नीचेकी ओर सिर किये विमानसहित आकाशसे पृथ्वीपर गिर पड़े। इस घटनासे उनके आश्‍चर्यकी सीमा न रही। जब उन्हें वालखिल्य मुनियोंने बतलाया कि यह नारायणकवच धारण करनेका प्रभाव है, तब उन्होंने उस ब्राह्मण देवताकी हड्डियोंको ले जाकर पूर्ववाहिनी सरस्वती नदीमें प्रवाहित कर दिया और फिर स्नान करके वे अपने लोकको गये॥ ४०॥

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