॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.9.10
द्रव्यभूयोवरेणापस्तुरीयं जगृहुर्मलम्।
तासु बुद्बुदफेनाभ्यां दृष्टं तद्धरति क्षिपन्॥ १०
dravyabhūyovareṇāpasturīyaṃ jagṛhurmalam|
tāsu budbudaphenābhyāṃ dṛṣṭaṃ taddharati kṣipan|| 10
अर्थ
जलने यह वर पाकर कि खर्च करते रहनेपर भी निर्झर आदिके रूपमें तुम्हारी बढ़ती ही होती रहेगी, ब्रह्महत्याका चौथा चतुर्थांश स्वीकार किया। फेन, बुद्बुद आदिके रूपमें वही ब्रह्महत्या दिखायी पड़ती है। अतएव मनुष्य उसे हटाकर जल ग्रहण किया करते हैं॥ १०॥