sa vai barhiṣi devebhyo bhāgaṃ pratyakṣamuccakaiḥ|
avadad yasya pitaro devāḥ sapraśrayaṃ nṛpa|| 2
अर्थ
उनके पिता त्वष्टा आदि बारह आदित्य देवता थे, इसलिये वे यज्ञके समय प्रत्यक्षरूपमें ऊँचे स्वरसे बोलकर बड़े विनयके साथ देवताओंको आहुति देते थे॥ २॥
स वै बर्हिषि देवेभ्यो भागं प्रत्यक्षमुच्चकैः।
अवदद् यस्य पितरो देवाः सप्रश्रयं नृप॥ २
उनके पिता त्वष्टा आदि बारह आदित्य देवता थे, इसलिये वे यज्ञके समय प्रत्यक्षरूपमें ऊँचे स्वरसे बोलकर बड़े विनयके साथ देवताओंको आहुति देते थे॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 744) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/9/2/