श्रीशुकदेवजी कहते हैं—महाराज! जब देवताओंने इस प्रकार भगवान्की स्तुति की, तब स्वयं शंख-चक्र-गदा-पद्मधारी भगवान् उनके सामने पश्चिमकी ओर (अन्तर्देशमें) प्रकट हुए॥ २८॥✎ 521522
इति तेषां महाराज सुराणामुपतिष्ठताम्।
प्रतीच्यां दिश्यभूदाविः शङ्खचक्रगदाधरः॥ २८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—महाराज! जब देवताओंने इस प्रकार भगवान्की स्तुति की, तब स्वयं शंख-चक्र-गदा-पद्मधारी भगवान् उनके सामने पश्चिमकी ओर (अन्तर्देशमें) प्रकट हुए॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 747) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/9/28/