श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.9.44

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

अथो ईश जहि त्वाष्ट्रं ग्रसन्तं भुवनत्रयम्।

ग्रस्तानि येन नः कृष्ण तेजांस्यस्त्रायुधानि च॥ ४४

atho īśa jahi tvāṣṭraṃ grasantaṃ bhuvanatrayam|

grastāni yena naḥ kṛṣṇa tejāṃsyastrāyudhāni ca|| 44

अर्थ

सर्वशक्तिमान् श्रीकृष्ण! वृत्रासुरने हमारे प्रभाव और अस्त्र-शस्त्रोंको तो निगल ही लिया है। अब वह तीनों लोकोंको भी ग्रस रहा है आप उसे मार डालिये॥ ४४॥

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