श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.9.7

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

भूमिस्तुरीयं जग्राह खातपूरवरेण वै।

ईरिणं ब्रह्महत्याया रूपं भूमौ प्रदृश्यते॥ ७

bhūmisturīyaṃ jagrāha khātapūravareṇa vai|

īriṇaṃ brahmahatyāyā rūpaṃ bhūmau pradṛśyate|| 7

अर्थ

परीक्षित्! पृथ्वीने बदलेमें यह वरदान लेकर कि जहाँ कहीं गड्ढा होगा, वह समयपर अपने-आप भर जायगा, इन्द्रकी ब्रह्महत्याका चतुर्थांश स्वीकार कर लिया। वही ब्रह्महत्या पृथ्वीमें कहीं-कहीं ऊसरके रूपमें दिखायी पड़ती है॥ ७॥

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