श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.13

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

दृष्ट्वा महाद्भुतं राजा राजसूये महाक्रतौ।

वासुदेवे भगवति सायुज्यं चेदिभूभु२जः॥ १३

dṛṣṭvā mahādbhutaṃ rājā rājasūye mahākratau|

vāsudeve bhagavati sāyujyaṃ cedibhūbhujaḥ|| 13

अर्थ

उस महान् राजसूय यज्ञमें राजा युधिष्ठिरने अपनी आँखोंके सामने बड़ी आश्‍चर्यजनक घटना देखी कि चेदिराज शिशुपाल सबके देखते-देखते भगवान् श्रीकृष्णमें समा गया॥ १३॥✎ 1615

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—भूभृतः।

    (मुद्रित पृष्ठ 806)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1615 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आश्‍चर्य-जनक → आश्‍चर्यजनक

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