राजन्! इसी विषयमें देवर्षि नारदने बड़े प्रेमसे एक इतिहास कहा था। यह उस समयकी बात है, जब राजसूय यज्ञमें तुम्हारे दादा युधिष्ठिरने उनसे इस सम्बन्धमें एक प्रश्न किया था॥ १२॥✎ 1615
अत्रैवोदाहृतः पूर्वमितिहासः सुरर्षिणा।
प्रीत्या महाक्रतौ राजन् पृच्छतेऽजातशत्रवे॥ १२
राजन्! इसी विषयमें देवर्षि नारदने बड़े प्रेमसे एक इतिहास कहा था। यह उस समयकी बात है, जब राजसूय यज्ञमें तुम्हारे दादा युधिष्ठिरने उनसे इस सम्बन्धमें एक प्रश्न किया था॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 806) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/1/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)