श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.21

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

राज्ञस्तद्वच आकर्ण्य नारदो भगवानृषिः।

तुष्टः प्राह तमाभाष्य शृण्वत्यास्तत्सदः कथाः॥ २१

rājñastadvaca ākarṇya nārado bhagavānṛṣiḥ|

tuṣṭaḥ prāha tamābhāṣya śṛṇvatyāstatsadaḥ kathāḥ|| 21

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—सर्वसमर्थ देवर्षि नारद राजाके ये प्रश्न सुनकर बहुत प्रसन्‍न हुए। उन्होंने युधिष्ठिरको सम्बोधित करके भरी सभामें सबके सुनते हुए यह कथा कही॥ २१॥

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