श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.23

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

हिंसा तदभिमानेन दण्डपारुष्ययोर्यथा।

वैषम्यमिह भूतानां ममाहमिति पार्थिव॥ २३

hiṃsā tadabhimānena daṇḍapāruṣyayoryathā|

vaiṣamyamiha bhūtānāṃ mamāhamiti pārthiva|| 23

अर्थ

जब इस शरीरको ही अपना आत्मा मान लिया जाता है, तब ‘यह मैं हूँ और यह मेरा है’ ऐसा भाव बन जाता है। यही सारे भेदभावका मूल है। इसीके कारण ताड़ना और दुर्वचनोंसे पीड़ा होती है॥ २३॥

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