यही बात भगवान् श्रीकृष्णके सम्बन्धमें भी है। लीलाके द्वारा मनुष्य मालूम पड़ते हुए ये सर्वशक्तिमान् भगवान् ही तो हैं। इनसे वैर करनेवाले भी इनका चिन्तन करते-करते पापरहित होकर इन्हींको प्राप्त हो गये॥ २८॥✎ 571572573574575576
एवं कृष्णे भगवति मायामनुज ईश्वरे।
वैरेण पूतपाप्मानस्तमापुरनुचिन्तया॥ २८
यही बात भगवान् श्रीकृष्णके सम्बन्धमें भी है। लीलाके द्वारा मनुष्य मालूम पड़ते हुए ये सर्वशक्तिमान् भगवान् ही तो हैं। इनसे वैर करनेवाले भी इनका चिन्तन करते-करते पापरहित होकर इन्हींको प्राप्त हो गये॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 808) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/1/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)
#571 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्में
#572 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्में