श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.39

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

जज्ञाते तौ दितेः पुत्रौ दैत्यदानववन्दितौ।

हिरण्यकशिपुर्ज्येष्ठो हिरण्याक्षोऽनुजस्ततः॥ ३९

jajñāte tau diteḥ putrau daityadānavavanditau|

hiraṇyakaśipurjyeṣṭho hiraṇyākṣo'nujastataḥ|| 39

अर्थ

युधिष्ठिर! वे ही दोनों दितिके पुत्र हुए। उनमें बड़ेका नाम हिरण्यकशिपु था और उससे छोटेका हिरण्याक्ष। दैत्य और दानवोंके समाजमें यही दोनों सर्वश्रेष्ठ थे॥ ३९॥✎ 577

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #577 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् ने → विष्णुभगवान्‌ने

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