श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.40

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

हतो हिरण्यकशिपुर्हरिणा सिंहरूपिणा।

हिरण्याक्षो धरोद्धारे बिभ्रता सौकरं वपुः॥ ४०

hato hiraṇyakaśipurhariṇā siṃharūpiṇā|

hiraṇyākṣo dharoddhāre bibhratā saukaraṃ vapuḥ|| 40

अर्थ

विष्णुभगवान्‌ने नृसिंहका रूप धारण करके हिरण्यकशिपुको और पृथ्वीका उद्धार करनेके समय वराहावतार ग्रहण करके हिरण्याक्षको मारा॥ ४०॥✎ 577

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #577 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् ने → विष्णुभगवान्‌ने

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