श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.5

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

गीयते परमं पुण्यमृषिभिर्नारदादिभिः।

नत्वा कृष्णाय मुनये कथयिष्ये हरेः कथाम्॥ ५

gīyate paramaṃ puṇyamṛṣibhirnāradādibhiḥ|

natvā kṛṣṇāya munaye kathayiṣye hareḥ kathām|| 5

अर्थ

इस परम पुण्यमय प्रसंगको नारदादि महात्मागण बड़े प्रेमसे गाते रहते हैं। अब मैं अपने पिता श्रीकृष्ण-द्वैपायन मुनिको नमस्कार करके भगवान्‌की लीला-कथाका वर्णन करता हूँ॥ ५॥✎ 562 563

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #562 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #563 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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