श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.17

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तस्मात् पिता मे पूयेत दुरन्ताद् दुस्तरादघात्।

पूतस्तेऽपाङ्गसंदृष्टस्तदा कृपणवत्सल॥ १७

tasmāt pitā me pūyeta durantād dustarādaghāt|

pūtaste'pāṅgasaṃdṛṣṭastadā kṛpaṇavatsala|| 17

अर्थ

दीनबन्धो! यद्यपि आपकी दृष्टि पड़ते ही वे पवित्र हो चुके, फिर भी मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि उस जल्दी नाश न होनेवाले दुस्तर दोषसे मेरे पिता शुद्ध हो जायँ॥ १७॥

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