श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.27

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

योऽसौ लब्धवरो मत्तो न वध्यो मम सृष्टिभिः।

तपोयोगबलोन्‍नद्धः१ समस्तनिगमानहन्॥ २७

yo'sau labdhavaro matto na vadhyo mama sṛṣṭibhiḥ|

tapoyogabalonnaddhaḥ samastanigamānahan|| 27

अर्थ

मैंने इसे वर दे दिया था कि मेरी सृष्टिका कोई भी प्राणी तुम्हारा वध न कर सकेगा। इससे यह मतवाला हो गया था। तपस्या, योग और बलके कारण उच्छृङ्खल होकर इसने वेदविधियोंका उच्छेद कर दिया था॥ २७॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—बलोन्मत्तः।

    (मुद्रित पृष्ठ 870)

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