श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.26

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ब्रह्मोवाच

देवदेवाखिलाध्यक्ष भूतभावन पूर्वज।

दिष्ट्या ते निहतः पापो लोकसन्तापनोऽसुरः॥ २६

devadevākhilādhyakṣa bhūtabhāvana pūrvaja|

diṣṭyā te nihataḥ pāpo lokasantāpano'suraḥ|| 26

अर्थ

ब्रह्माजीने कहा—देवताओंके आराध्यदेव! आप सर्वान्तर्यामी, जीवोंके जीवनदाता और मेरे भी पिता हैं। यह पापी दैत्य लोगोंको बहुत ही सता रहा था। यह बड़े सौभाग्यकी बात है कि आपने इसे मार डाला॥ २६॥

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