इसी समय देवता, ऋषि आदिके साथ ब्रह्माजीने नृसिंहभगवान्को प्रसन्नवदन देखकर पवित्र वचनोंके द्वारा उनकी स्तुति की और उनसे यह बात कही॥ २५॥✎ 627628
प्रसादसुमुखं दृष्ट्वा ब्रह्मा नरहरिं हरिम्।
स्तुत्वा वाग्भिः पवित्राभिः प्राह देवादिभिर्वृतः॥ २५
इसी समय देवता, ऋषि आदिके साथ ब्रह्माजीने नृसिंहभगवान्को प्रसन्नवदन देखकर पवित्र वचनोंके द्वारा उनकी स्तुति की और उनसे यह बात कही॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 869) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/10/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#627 शब्दोंके बीचका स्थान: नृसिंहभगवान् को → नृसिंहभगवान्को