फिर ब्रह्मादि देवताओंने प्रह्लादका अभिनन्दन किया और उन्हें शुभाशीर्वाद दिये। प्रह्लादजीने भी यथायोग्य सबका सत्कार किया और वे लोग अपने-अपने लोकोंको चले गये॥ ३४॥
प्रतिनन्द्य ततो देवाः प्रयुज्य परमाशिषः।
स्वधामानि ययू राजन्ब्रह्माद्याः प्रतिपूजिताः॥ ३४
फिर ब्रह्मादि देवताओंने प्रह्लादका अभिनन्दन किया और उन्हें शुभाशीर्वाद दिये। प्रह्लादजीने भी यथायोग्य सबका सत्कार किया और वे लोग अपने-अपने लोकोंको चले गये॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 870) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/34/