श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.37

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

शयानौ युधि निर्भिन्‍नहृदयौ रामसायकैः।

तच्चित्तौ जहतुर्देहं यथा प्राक्तनजन्मनि॥ ३७

śayānau yudhi nirbhinnahṛdayau rāmasāyakaiḥ|

taccittau jahaturdehaṃ yathā prāktanajanmani|| 37

अर्थ

युद्धमें भगवान् रामके बाणोंसे उनका कलेजा फट गया। वहीं पड़े-पड़े पूर्वजन्मकी भाँति भगवान्‌का स्मरण करते-करते उन्होंने अपने शरीर छोड़े॥ ३७॥

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