श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.36

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

पुनश्‍च विप्रशापेन राक्षसौ तौ बभूवतुः।

कुम्भकर्णदशग्रीवौ हतौ तौ रामविक्रमैः॥ ३६

punaśca vipraśāpena rākṣasau tau babhūvatuḥ|

kumbhakarṇadaśagrīvau hatau tau rāmavikramaiḥ|| 36

अर्थ

ऋषियोंके शापके कारण उनकी मुक्ति नहीं हुई, वे फिरसे कुम्भकर्ण और रावणके रूपमें राक्षस हुए। उस समय भगवान् श्रीरामके पराक्रमसे उनका अन्त हुआ॥ ३६॥

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