kumbhakarṇadaśagrīvau hatau tau rāmavikramaiḥ|| 36
अर्थ
ऋषियोंके शापके कारण उनकी मुक्ति नहीं हुई, वे फिरसे कुम्भकर्ण और रावणके रूपमें राक्षस हुए। उस समय भगवान् श्रीरामके पराक्रमसे उनका अन्त हुआ॥ ३६॥
पुनश्च विप्रशापेन राक्षसौ तौ बभूवतुः।
कुम्भकर्णदशग्रीवौ हतौ तौ रामविक्रमैः॥ ३६
ऋषियोंके शापके कारण उनकी मुक्ति नहीं हुई, वे फिरसे कुम्भकर्ण और रावणके रूपमें राक्षस हुए। उस समय भगवान् श्रीरामके पराक्रमसे उनका अन्त हुआ॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 871) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/10/36/