श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.41

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

आख्यातं सर्वमेतत् ते यन्मां त्वं परिपृष्टवान्।

दमघोषसुतादीनां हरेः सात्म्यमपि द्विषाम्॥ ४१

ākhyātaṃ sarvametat te yanmāṃ tvaṃ paripṛṣṭavān|

damaghoṣasutādīnāṃ hareḥ sātmyamapi dviṣām|| 41

अर्थ

युधिष्ठिर! तुमने मुझसे पूछा था कि भगवान्‌से द्वेष करनेवाले शिशुपाल आदिको उनके सारूप्यकी प्राप्ति कैसे हुई। उसका उत्तर मैंने तुम्हें दे दिया॥ ४१॥✎ 631

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #631 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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