जिसके द्वारा भगवान्की प्राप्ति होती है, उस भागवत-धर्मका भी वर्णन है। अध्यात्मके सम्बन्धमें भी सभी जाननेयोग्य बातें इसमें हैं॥ ४५॥✎ 632
धर्मो भागवतानां च भगवान्येन गम्यते।
आख्यानेऽस्मिन्समाम्नातमाध्यात्मिकमशेषतः॥ ४५
जिसके द्वारा भगवान्की प्राप्ति होती है, उस भागवत-धर्मका भी वर्णन है। अध्यात्मके सम्बन्धमें भी सभी जाननेयोग्य बातें इसमें हैं॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 871) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/10/45/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)