भगवान्के पराक्रमसे पूर्ण इस पवित्र आख्यानको जो कोई पुरुष श्रद्धासे कीर्तन करता और सुनता है, वह कर्मबन्धनसे मुक्त हो जाता है॥ ४६॥✎ 632
य एतत् पुण्यमाख्यानं विष्णोर्वीर्योपबृंहितम्।
कीर्तयेच्छ्रद्धया श्रुत्वा कर्मपाशैर्विमुच्यते॥ ४६
भगवान्के पराक्रमसे पूर्ण इस पवित्र आख्यानको जो कोई पुरुष श्रद्धासे कीर्तन करता और सुनता है, वह कर्मबन्धनसे मुक्त हो जाता है॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 871) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/10/46/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)