श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.11.35

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

यस्य यल्लक्षणं प्रोक्तं पुंसो वर्णाभिव्यञ्जकम्।

यदन्यत्रापि दृश्येत तत् तेनैव विनिर्दिशेत्॥ ३५

yasya yallakṣaṇaṃ proktaṃ puṃso varṇābhivyañjakam|

yadanyatrāpi dṛśyeta tat tenaiva vinirdiśet|| 35

अर्थ

जिस पुरुषके वर्णको बतलानेवाला जो लक्षण कहा गया है, वह यदि दूसरे वर्णवालेमें भी मिले तो उसे भी उसी वर्णका समझना चाहिये॥ ३५॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां सप्तमस्कन्धे युधिष्ठिरनारदसंवादे
सदाचारनिर्णयो नामैकादशोऽध्यायः
॥ ११॥

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