यस्य यल्लक्षणं प्रोक्तं पुंसो वर्णाभिव्यञ्जकम्।
यदन्यत्रापि दृश्येत तत् तेनैव विनिर्दिशेत्॥ ३५
जिस पुरुषके वर्णको बतलानेवाला जो लक्षण कहा गया है, वह यदि दूसरे वर्णवालेमें भी मिले तो उसे भी उसी वर्णका समझना चाहिये॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.11.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 878) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/11/35/