भगवान्के परम प्रेमी भक्त प्रह्लादजीने अपने सिरसे उनके चरणोंका स्पर्श करके प्रणाम किया और विधिपूर्वक उनकी पूजा करके जाननेकी इच्छासे यह प्रश्न किया॥ १५॥
तं नत्वाभ्यर्च्य विधिवत् पादयोः शिरसा स्पृशन्।
विवित्सुरिदमप्राक्षीन्महाभागवतोऽसुरः ॥ १५
भगवान्के परम प्रेमी भक्त प्रह्लादजीने अपने सिरसे उनके चरणोंका स्पर्श करके प्रणाम किया और विधिपूर्वक उनकी पूजा करके जाननेकी इच्छासे यह प्रश्न किया॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.13.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 885) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/13/15/