श्राद्धं पित्रोर्यथावित्तं तद्बन्धूनां च वित्तवान्॥ १९
kuryādāparapakṣīyaṃ māsi prauṣṭhapade dvijaḥ|
śrāddhaṃ pitroryathāvittaṃ tadbandhūnāṃ ca vittavān|| 19
अर्थ
धनी द्विजको अपने धनके अनुसार आश्विन मासके कृष्णपक्षमें अपने माता-पिता तथा उनके बन्धुओं (पितामह, मातामह आदि)-का भी महालय श्राद्ध करना चाहिये॥ १९॥✎ 639
कुर्यादापरपक्षीयं मासि प्रौष्ठपदे द्विजः।
श्राद्धं पित्रोर्यथावित्तं तद्बन्धूनां च वित्तवान्॥ १९
धनी द्विजको अपने धनके अनुसार आश्विन मासके कृष्णपक्षमें अपने माता-पिता तथा उनके बन्धुओं (पितामह, मातामह आदि)-का भी महालय श्राद्ध करना चाहिये॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.14.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 891) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/14/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)