एक बार देवताओंके यहाँ ज्ञानसत्र हुआ। उसमें बड़े-बड़े प्रजापति आये थे। भगवान्की लीलाका गान करनेके लिये उन लोगोंने गन्धर्व और अप्सराओंको बुलाया॥ ७१॥✎ 647648
एकदा देवसत्रे तु गन्धर्वाप्सरसां गणाः।
उपहूता विश्वसृग्भिर्हरिगाथोपगायने॥ ७१
एक बार देवताओंके यहाँ ज्ञानसत्र हुआ। उसमें बड़े-बड़े प्रजापति आये थे। भगवान्की लीलाका गान करनेके लिये उन लोगोंने गन्धर्व और अप्सराओंको बुलाया॥ ७१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.15.71 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 903) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/15/71/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)