श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! देवर्षि नारदका यह प्रवचन सुनकर राजा युधिष्ठिरको अत्यन्त आनन्द हुआ। उन्होंने प्रेम-विह्वल होकर देवर्षि नारद और भगवान् श्रीकृष्णकी पूजा की॥ ७८॥
इति देवर्षिणा प्रोक्तं निशम्य भरतर्षभः।
पूजयामास सुप्रीतः कृष्णं च प्रेमविह्वलः॥ ७८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! देवर्षि नारदका यह प्रवचन सुनकर राजा युधिष्ठिरको अत्यन्त आनन्द हुआ। उन्होंने प्रेम-विह्वल होकर देवर्षि नारद और भगवान् श्रीकृष्णकी पूजा की॥ ७८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.15.78 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 904) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/15/78/