देवर्षि नारद भगवान् श्रीकृष्ण और राजा युधिष्ठिरसे विदा लेकर और उनके द्वारा सत्कार पाकर चले गये। भगवान् श्रीकृष्ण ही परब्रह्म हैं, यह सुनकर युधिष्ठिरके आश्चर्यकी सीमा न रही॥ ७९॥✎ 1621
कृष्णपार्थावुपामन्त्र्य पूजितः प्रययौ मुनिः।
श्रुत्वा कृष्णं परं ब्रह्म पार्थः परमविस्मितः॥ ७९
देवर्षि नारद भगवान् श्रीकृष्ण और राजा युधिष्ठिरसे विदा लेकर और उनके द्वारा सत्कार पाकर चले गये। भगवान् श्रीकृष्ण ही परब्रह्म हैं, यह सुनकर युधिष्ठिरके आश्चर्यकी सीमा न रही॥ ७९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.15.79 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 904) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/15/79/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)