श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.26

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सम्भवश्‍च विनाशश्‍च शोकश्‍च विविधः स्मृतः।

अविवेकश्‍च चिन्ता च विवेकास्मृतिरेव च॥ २६

sambhavaśca vināśaśca śokaśca vividhaḥ smṛtaḥ|

avivekaśca cintā ca vivekāsmṛtireva ca|| 26

अर्थ

जन्म, मृत्यु, अनेकों प्रकारके शोक, अविवेक, चिन्ता और विवेककी विस्मृति—सबका कारण यह अज्ञान ही है॥ २६॥

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