॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.2.26
सम्भवश्च विनाशश्च शोकश्च विविधः स्मृतः।
अविवेकश्च चिन्ता च विवेकास्मृतिरेव च॥ २६
sambhavaśca vināśaśca śokaśca vividhaḥ smṛtaḥ|
avivekaśca cintā ca vivekāsmṛtireva ca|| 26
अर्थ
जन्म, मृत्यु, अनेकों प्रकारके शोक, अविवेक, चिन्ता और विवेककी विस्मृति—सबका कारण यह अज्ञान ही है॥ २६॥