॥ श्रीहरिः ॥
अद्राक्षमहमेतत्ते हृत्सारं महदद्भुतम्।
दंशभक्षितदेहस्य प्राणा ह्यस्थिषु शेरते॥ १८
adrākṣamahametatte hṛtsāraṃ mahadadbhutam|
daṃśabhakṣitadehasya prāṇā hyasthiṣu śerate|| 18
अर्थ
मैंने तुम्हारे हृदयका अद्भुत बल देखा। अरे, डाँसोंने तुम्हारी देह खा डाली है। फिर भी तुम्हारे प्राण हड्डियोंके सहारे टिके हुए हैं॥ १८॥
अद्राक्षमहमेतत्ते हृत्सारं महदद्भुतम्।
दंशभक्षितदेहस्य प्राणा ह्यस्थिषु शेरते॥ १८
मैंने तुम्हारे हृदयका अद्भुत बल देखा। अरे, डाँसोंने तुम्हारी देह खा डाली है। फिर भी तुम्हारे प्राण हड्डियोंके सहारे टिके हुए हैं॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.3.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 820) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/3/18/