niramburdhārayetprāṇān ko vai divyasamāḥ śatam|| 19
अर्थ
ऐसी कठिन तपस्या न तो पहले किसी ऋषिने की थी और न आगे ही कोई करेगा। भला ऐसा कौन है जो देवताओंके सौ वर्षतक बिना पानीके जीता रहे॥ १९॥
नैतत्पूर्वर्षयश्चक्रुर्न करिष्यन्ति चापरे।
निरम्बुर्धारयेत्प्राणान् को वै दिव्यसमाः शतम्॥ १९
ऐसी कठिन तपस्या न तो पहले किसी ऋषिने की थी और न आगे ही कोई करेगा। भला ऐसा कौन है जो देवताओंके सौ वर्षतक बिना पानीके जीता रहे॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.3.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 820) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/3/19/