श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.3.20

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

व्यवसायेन तेऽनेन दुष्करेण मनस्विनाम्।

तपोनिष्ठेन भवता जितोऽहं दितिनन्दन॥ २०

vyavasāyena te'nena duṣkareṇa manasvinām|

taponiṣṭhena bhavatā jito'haṃ ditinandana|| 20

अर्थ

बेटा हिरण्यकशिपु! तुम्हारा यह काम बड़े-बड़े धीर पुरुष भी कठिनतासे कर सकते हैं। तुमने इस तपोनिष्ठासे मुझे अपने वशमें कर लिया है॥ २०॥

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