श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.3.22

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

नारद उवाच

इत्युक्‍त्वाऽऽदिभवो देवो भक्षिताङ्गं पिपीलिकैः।

कमण्डलुजलेनौक्षद्दिव्येनामोघराधसा ॥ २२

ityuktvā''dibhavo devo bhakṣitāṅgaṃ pipīlikaiḥ|

kamaṇḍalujalenaukṣaddivyenāmogharādhasā || 22

अर्थ

नारदजी कहते हैं—युधिष्ठिर! इतना कहकर ब्रह्माजीने उसके चींटियोंसे खाये हुए शरीरपर अपने कमण्डलुका दिव्य एवं अमोघ प्रभावशाली जल छिड़क दिया॥ २२॥

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