उसके कठोर शासनसे सब लोक और लोकपाल घबरा गये। जब उन्हें और कहीं किसीका आश्रय न मिला, तब उन्होंने भगवान्की शरण ली॥ २१॥✎ 582583
तस्योग्रदण्डसंविग्नाः सर्वे लोकाः सपालकाः।
अन्यत्रालब्धशरणाः शरणं ययुरच्युतम्॥ २१
उसके कठोर शासनसे सब लोक और लोकपाल घबरा गये। जब उन्हें और कहीं किसीका आश्रय न मिला, तब उन्होंने भगवान्की शरण ली॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.4.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 825) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/4/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)