एक दिन उन्हें मेघके समान गम्भीर आकाशवाणी सुनायी पड़ी। उसकी ध्वनिसे दिशाएँ गूँज उठीं। साधुओंको अभय देनेवाली वह वाणी यों थी—॥ २४॥✎ 582583
तेषामाविरभूद्वाणी अरूपा मेघनिःस्वना।
सन्नादयन्ती ककुभः साधूनामभयङ्करी॥ २४
एक दिन उन्हें मेघके समान गम्भीर आकाशवाणी सुनायी पड़ी। उसकी ध्वनिसे दिशाएँ गूँज उठीं। साधुओंको अभय देनेवाली वह वाणी यों थी—॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.4.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 825) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/4/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)