‘श्रेष्ठ देवताओ! डरो मत। तुम सब लोगोंका कल्याण हो। मेरे दर्शनसे प्राणियोंको परम कल्याणकी प्राप्ति हो जाती है॥ २५॥✎ 582583
मा भैष्ट विबुधश्रेष्ठाः सर्वेषां भद्रमस्तु वः।
मद्दर्शनं हि भूतानां सर्वश्रेयोपपत्तये॥ २५
‘श्रेष्ठ देवताओ! डरो मत। तुम सब लोगोंका कल्याण हो। मेरे दर्शनसे प्राणियोंको परम कल्याणकी प्राप्ति हो जाती है॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.4.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 825) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/4/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)