श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.4.30

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तस्य दैत्यपतेः पुत्राश्‍चत्वारः परमाद्भुताः।

प्रह्रादोऽभून्महांस्तेषां गुणैर्महदुपासकः॥ ३०

tasya daityapateḥ putrāścatvāraḥ paramādbhutāḥ|

prahrādo'bhūnmahāṃsteṣāṃ guṇairmahadupāsakaḥ|| 30

अर्थ

युधिष्ठिर! दैत्यराज हिरण्यकशिपुके बड़े ही विलक्षण चार पुत्र थे। उनमें प्रह्लाद यों तो सबसे छोटे थे, परन्तु गुणोंमें सबसे बड़े थे। वे बड़े संतसेवी थे॥ ३०॥

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