वे भगवान् ही जब कृपा करते हैं, तब मनुष्योंकी पाशविक बुद्धि नष्ट होती है। इस पशुबुद्धिके कारण ही तो ‘यह मैं हूँ और यह मुझसे भिन्न है’ इस प्रकारका झूठा भेदभाव पैदा होता है॥ १२॥✎ 585586
स यदानुव्रतः पुंसां पशुबुद्धिर्विभिद्यते।
अन्य एष तथान्योऽहमिति भेदगतासती॥ १२
वे भगवान् ही जब कृपा करते हैं, तब मनुष्योंकी पाशविक बुद्धि नष्ट होती है। इस पशुबुद्धिके कारण ही तो ‘यह मैं हूँ और यह मुझसे भिन्न है’ इस प्रकारका झूठा भेदभाव पैदा होता है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.5.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 829) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/5/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)