taṃ nirbhartsyātha kupitaḥ sa dīno rājasevakaḥ|| 15
अर्थ
नारदजी कहते हैं—परमज्ञानी प्रह्लाद अपने गुरुजीसे इतना कहकर चुप हो गये। पुरोहित बेचारे राजाके सेवक एवं पराधीन थे। वे डर गये। उन्होंने क्रोधसे प्रह्लादको झिड़क दिया और कहा—॥ १५॥
एतावद्ब्राह्मणायोक्त्वा विरराम महामतिः।
तं निर्भर्त्स्याथ कुपितः स दीनो राजसेवकः॥ १५
नारदजी कहते हैं—परमज्ञानी प्रह्लाद अपने गुरुजीसे इतना कहकर चुप हो गये। पुरोहित बेचारे राजाके सेवक एवं पराधीन थे। वे डर गये। उन्होंने क्रोधसे प्रह्लादको झिड़क दिया और कहा—॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.5.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 830) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/5/15/