॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.5.43
diggajairdandaśūkaiśca abhicārāvapātanaiḥ|
māyābhiḥ saṃnirodhaiśca garadānairabhojanaiḥ|| 43
अर्थ
उसने उन्हें बड़े-बड़े मतवाले हाथियोंसे कुचलवाया, विषधर साँपोंसे डँसवाया, पुरोहितोंसे कृत्या राक्षसी उत्पन्न करायी, पहाड़की चोटीसे नीचे डलवा दिया, शम्बरासुरसे अनेकों प्रकारकी मायाका प्रयोग करवाया, अँधेरी कोठरियोंमें बंद करा दिया, विष पिलाया और खाना बंद कर दिया॥ ४३॥
टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—शूकेन्द्रैरभिचाराभिपात०।