॥ श्रीहरिः ॥
यदाऽऽचार्यः परावृत्तो गृहमेधीयकर्मसु।
वयस्यैर्बालकैस्तत्र सोपहूतः कृतक्षणैः॥ ५४
yadā''cāryaḥ parāvṛtto gṛhamedhīyakarmasu|
vayasyairbālakaistatra sopahūtaḥ kṛtakṣaṇaiḥ|| 54
अर्थ
एक दिन गुरुजी गृहस्थीके कामसे कहीं बाहर चले गये थे। छुट्टी मिल जानेके कारण समवयस्क बालकोंने प्रह्लादजीको खेलनेके लिये पुकारा॥ ५४॥
यदाऽऽचार्यः परावृत्तो गृहमेधीयकर्मसु।
वयस्यैर्बालकैस्तत्र सोपहूतः कृतक्षणैः॥ ५४
एक दिन गुरुजी गृहस्थीके कामसे कहीं बाहर चले गये थे। छुट्टी मिल जानेके कारण समवयस्क बालकोंने प्रह्लादजीको खेलनेके लिये पुकारा॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.5.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 835) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/5/54/