श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.6.6

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

पुंसो वर्षशतं ह्यायुस्तदर्धं चाजितात्मनः।

निष्फलं यदसौ रात्र्यां शेतेऽन्धं प्रापितस्तमः॥ ६

puṃso varṣaśataṃ hyāyustadardhaṃ cājitātmanaḥ|

niṣphalaṃ yadasau rātryāṃ śete'ndhaṃ prāpitastamaḥ|| 6

अर्थ

मनुष्यकी पूरी आयु सौ वर्षकी है। जिन्होंने अपनी इन्द्रियोंको वशमें नहीं कर लिया है, उनकी आयुका आधा हिस्सा तो यों ही बीत जाता है। क्योंकि वे रातमें घोर तमोगुण—अज्ञानसे ग्रस्त होकर सोते रहते हैं॥ ६॥

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